स्कूल न होने के कारण बच्चो मे उत्साह कम हो गए है । तो क्या करे !
सबसे पहेले तो हम सबमे उत्साह खत्म हो गया है। लेकिन ऐसा होना स्वाभाविक होता है। पर चाल को सहि बनाए रखना जरूरी है । साथ ही साथ कड़ी मेहनत भी ।मगर आप अपने बच्चे को कैसे प्रेरित रखते हैं? ये है
विशेष महत्व का सवाल, जब बच्चा स्कूलो के बाद जाते थे और कार्यक्रमो मे तो बच्चो मे हममे एक समानता बना रहता था। पर अब ऐसा कतइ नही है ना ही अचानक से होगा ।जो कुछ पढे है अनलाइन वे भी आधी-अधूरी सी है, एक सन्तुष्टि नही है ।
क्योंकि अनलाइन पे वो सब नही बनता जो स्कूलो के कक्षा मे बनते थे । सैकडो सालो से जो करते आ रहे थे सब छोडना पड रहा है । अकादमिक करियर की तो धज्जियां उड़ गई । जो धनवान या चालाक है उनकी तो निकल जाएगे पर आप हम जैसोकी क्या ? इसीलिए अभी से बच्चो के साथ संबंध जल्दी बनाएं:
अपने बच्चे को यह समझने दें कि पढ़ाई कितनी महत्वपूर्ण है। उसे बताएं कि
एक उत्कृष्ट करियर पूरी तरह से स्वस्थ शिक्षा पर निर्भर है। विकसित होना,
पढ़ाई में उसकी रुचि, पारिवारिक गतिविधियों की योजना अभिसे बनाएं जो इससे जुड़ी हों
उसकी पढाई। जब भी शिक्षाविदों के साथ वास्तविक दुनिया के संबंध पर जोर दें । मुमकिन लक्ष्य पर ध्यान देने सलाह दे । उदाहरण के माध्यम से अपने बच्चे को बताएं कि कड़ी मेहनत का प्रतिफल अवश्य मिलेगा। अगर
आपका बच्चा मानता है कि उपलब्धि प्रयास का एक स्वाभाविक उपोत्पाद है, वह
कड़ी मेहनत करने की अधिक संभावना करेगे ।
जब कोई बच्चा कुछ हासिल करता है तो उसकी मेहनत की तारीफ करना जरूरी होता है।
सकारात्मक सुदृढीकरण आत्मविश्वास को बढ़ाता है और आत्म-सम्मान को बढ़ाता है।
इसके विपरीत, आलोचना से सावधान रहें। यह बच्चों के कमजोर अहंकार को बर्बाद कर सकता है और
उनके दिमाग से खिलवाड़ करते हैं।
अब तो बस हमको हि करना है अपने बच्चो के लिए । अपने बच्चे को कैसे शिक्षा देगे या भविष्य मे क्या होगा उनकी जीवने, ये सब हमारे उपर है । सोचलो अभी से, दो ढाई साल से अपने जीवन पर, बच्चो के शिक्षा पर रोक लगना कम नही होता । न जाने हम लोग कौन दिशा पे जा रहे है । क्योकि ये बिमारीया खतम होने वाला नही है । तो समय को समझो और सही क्या है उन्हे ही करो, नही तो कुछ लोग आगे निकल जाएगे और केवल आप..............केवल आप पिछे रहे जावोगे ।
गोपाल


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