१] आज तुमने जो देखा
जख्म जो पहेले हम सहते थे
अब सूद समेत देने लगे है हम ।।
२] ताकत कि तुम जोर न देना
ताकत याहाँ भी भरे पड़े है ।
देखलो तुम मरने से पहेले
देशके सारे शूरवीर खडे है ।।
३] वो धरती सायद व्यापार होगा
पर मेरा तो ये माता है ।
जिस मिट्टी को तूम रौद रहे हो
वो तो जीवन विधाता है ।।
४] उस जीतको तुम कभि घमण्ड नकरना
उस बातको बिते अरसा हुए ।
इस दौर मे तुम भी कुछ बदले हो
इस दौर मे हम भी कुछ बदले है ।।
५] अब भूल कर भी गलती मत करना
वो वक्त कबका बदल चुका है ।
खून के कतरा कतरा तक लडने को
देश के रक्षक अब निकल चुका है
देश के रक्षक अब निकल चूका है ।।
गोपाल थापा,

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