Thursday, August 5, 2021

एक कविता राष्ट्र के नाम ।

 


१] आज तुमने जो देखा 

कलको भी दिखलाएंगे हम ।

जख्म जो पहेले हम सहते थे

अब सूद समेत देने लगे है हम ।।

        २] ताकत कि तुम जोर न देना 

            ताकत याहाँ भी भरे पड़े है ।

            देखलो तुम मरने से पहेले

           देशके सारे शूरवीर खडे है ।।

३] वो धरती  सायद व्यापार होगा 

पर मेरा तो ये माता है ।

जिस मिट्टी को तूम रौद रहे हो

वो तो जीवन विधाता है ।।

             ४] उस जीतको तुम कभि घमण्ड नकरना 

                 उस बातको बिते अरसा हुए ।

                  इस दौर मे तुम भी कुछ बदले हो 

                  इस दौर मे हम भी कुछ बदले है ।।

५] अब भूल कर भी गलती मत करना

वो वक्त कबका बदल चुका है ।

खून के कतरा कतरा तक लडने को 

देश के रक्षक अब निकल चुका है 

देश के रक्षक अब निकल चूका है ।।


गोपाल थापा,













        

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